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पीएम किसान लैंड सीडिंग

संक्षेप में

  • लैंड सीडिंग से आपका पीएम किसान रिकॉर्ड राज्य के ज़मीन के रिकॉर्ड से जुड़ता है।
  • इसके आगे No है, तो बाकी सब ठीक होने पर भी क़िस्त रुकी रहती है।
  • आम वजह: नाम का न मिलना, या ज़मीन का अब भी पिता या किसी और के नाम होना।
  • इसे पटवारी या लेखपाल और कृषि कार्यालय से ठीक करवाएँ। नाम या मालिकाना हक़ की गलती पहले तहसील में सुधरती है।
pmkisan.gov.in पर स्टेटस में लैंड सीडिंग देखें

लैंड सीडिंग क्या है?

पीएम किसान सिर्फ़ उन्हीं को मिलता है जिनके नाम खेती की ज़मीन है। यह पक्का करने के लिए राज्य सरकार आपके पीएम किसान रिकॉर्ड को राज्य के भूमि रिकॉर्ड (खतौनी, खसरा, जमाबंदी आदि) से जोड़ती है। इसी जोड़ने को लैंड सीडिंग कहते हैं।

लैंड सीडिंग क़िस्त के लिए ज़रूरी तीन चीज़ों में से एक है। बाकी दो हैं ई-केवाईसी और आधार–बैंक सीडिंग। लैंड सीडिंग No है, तो बाकी सब ठीक होने पर भी क़िस्त रुकी रहती है।

लैंड सीडिंग का स्टेटस कैसे देखें

  1. pmkisan.gov.in पर Know Your Status खोलें।
  2. रजिस्ट्रेशन नंबर, कैप्चा और OTP डालें।
  3. Eligibility Status में Land Seeding के आगे देखें: Yes या No।
Sample Image pmkisan.gov.in पर Know Your Status का फ़ॉर्म: रजिस्ट्रेशन नंबर, कैप्चा और Get OTP बटन
Know Your Status खोलकर Eligibility Status में Land Seeding देखें।

पूरा तरीका स्टेटस वाले हिस्से में है।

लैंड सीडिंग No क्यों आता है

  • राज्य ने अभी तक आपकी ज़मीन का रिकॉर्ड जाँचकर जोड़ा नहीं है।
  • भूमि रिकॉर्ड में नाम एक तरह लिखा है, और आधार या पीएम किसान में दूसरी तरह।
  • ज़मीन अभी भी पिता, दादा या किसी और के नाम दर्ज है।
  • ज़मीन के मालिक की मृत्यु के बाद वारिस का नाम (वरासत / दाखिल-खारिज / नामांतरण) अभी चढ़ा नहीं है।
  • रजिस्ट्रेशन में ज़मीन का खाता या खसरा नंबर गलत भरा गया।
  • रजिस्ट्रेशन में राज्य या ज़िला गलत दर्ज है, जबकि ज़मीन कहीं और है। इसके लिए स्टेट ट्रांसफ़र (पता सुधार) देखें।

लैंड सीडिंग No है तो क्या करें

  1. कागज़ तैयार करें। ज़मीन के ताज़ा कागज़ की नकल, आधार कार्ड और पीएम किसान का रजिस्ट्रेशन नंबर।
  2. भूमि रिकॉर्ड देखें। अपने राज्य की भूलेख वेबसाइट पर देखें कि ज़मीन आपके नाम है और नाम आधार जैसा ही लिखा है। नीचे की तालिका में हर राज्य के कागज़ का नाम है। यही रिकॉर्ड फ़ार्मर आईडी बनाने में भी काम आता है।
  3. कृषि कार्यालय या पटवारी / लेखपाल से मिलें। बताएँ कि पीएम किसान में लैंड सीडिंग No है, और कागज़ जमा करें।
  4. नाम या मालिकाना ठीक करवाएँ। गलती भूमि रिकॉर्ड में है, तो पहले तहसील में उसे ठीक करवाना होगा। उसके बाद ही सीडिंग होगी।
  5. स्टेटस देखते रहें। कुछ हफ़्तों बाद स्टेटस में Land Seeding देखें।

किस राज्य में ज़मीन का कौन-सा कागज़

हर राज्य में ज़मीन के रिकॉर्ड का नाम अलग है। पटवारी या कृषि कार्यालय में यही नाम बताएँ:

राज्यज़मीन का कागज़रिकॉर्ड रखने वाले
उत्तर प्रदेशखतौनीलेखपाल
बिहारजमाबंदी, खतियानराजस्व कर्मचारी
मध्य प्रदेशखसरा, B-1पटवारी
राजस्थानजमाबंदीपटवारी
हरियाणा, पंजाबजमाबंदी (फ़र्द)पटवारी
महाराष्ट्रसात-बारा (7/12)तलाठी
गुजरात7/12, 8-अतलाटी
छत्तीसगढ़खसरा, B-1पटवारी
झारखंडखतियान, रजिस्टर-2राजस्व कर्मचारी

पद के नाम एक ही राज्य के अलग इलाकों में थोड़े अलग हो सकते हैं। मतलब वही है: गाँव का ज़मीन का रिकॉर्ड रखने वाला कर्मचारी।

विरासत में मिली ज़मीन

पिता या माता की मृत्यु के बाद ज़मीन आपके नाम तभी मानी जाती है जब भूमि रिकॉर्ड में आपका नाम चढ़ जाए। इसे राज्य के हिसाब से वरासत, दाखिल-खारिज या नामांतरण (म्यूटेशन) कहते हैं।

  1. तहसील में मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिसों की जानकारी देकर नाम चढ़वाएँ।
  2. नाम चढ़ने के बाद नई खतौनी या जमाबंदी की नकल लें।
  3. उसे कृषि कार्यालय में जमा करके लैंड सीडिंग करवाएँ।

भाइयों में बँटवारा न हुआ हो और ज़मीन सबके साझे नाम पर हो, तो हर भाई अपने परिवार के लिए अलग से योग्य हो सकता है, बशर्ते बाकी शर्तें पूरी हों। अपने ज़िले के नियम कृषि कार्यालय से पूछ लें।

आम सवाल

लैंड सीडिंग होने में कितना समय लगता है?

कोई तय समय नहीं है। कागज़ ठीक हों, तो आमतौर पर कुछ हफ़्ते। भूमि रिकॉर्ड में सुधार करवाना पड़े, तो ज़्यादा समय लगता है।

लैंड सीडिंग ऑनलाइन खुद कर सकते हैं?

नहीं। यह राज्य सरकार के कृषि और राजस्व विभाग का काम है। आप सिर्फ़ स्टेटस देख सकते हैं और कागज़ जमा कर सकते हैं।

लैंड सीडिंग Yes होने के बाद रुकी क़िस्त मिलेगी?

Yes होने के बाद आने वाली क़िस्त मिलती है। पहले की रुकी क़िस्तों के बारे में अपने कृषि कार्यालय से पता करें।

क्या यह सरकारी वेबसाइट है?

नहीं। किसान क़िस्त मेरी अपनी वेबसाइट है। आपके रिकॉर्ड सरकार के पास हैं, और उन्हें सिर्फ़ सरकार ही ठीक कर सकती है।

जानकारी का स्रोत: pmkisan.gov.in, राज्यों के भूमि रिकॉर्ड